Monday, December 31, 2018

गुलामो का हक़

एक ताबई कहते है कि मैने सहाबी ए रसूल हज़रत अबु ज़र से मक़ामे रब्ज़ा में मुलाकात की (तो देखा)उन के जिस्म पर जिस किस्म का तहबन्द और चादर था उस किस्म का चादर और तहबन्द  उन के गुलाम के जिस्म पर था मैंने अबु ज़र रजिल्लाहो तआला अन्हो से इसका सबब पूछा तो आप ने फरमाया -  ( एक बार)मैने एक शख्स (जो मेरी गुलामी में था)को अपशब्द कहे यानी उस को माँ से गैरत दिलाई थी ये खबर नबी सल्लहो अलैही व सल्लम को पहुची तो आप सल्लहो अलैही व सल्लम ने मुझ से कहा -"अबु जर  क्या तुम ने उससे उस की माँ की गैरत दिलाई है तुम ऐसे आदमी हो कि तुम में अभी जहालत( के असरात) बाकी है तुम्हारे गुलाम तुम्हारे भाई है उन को अल्लाह ने तुम्हारे कब्जे में दिया है  जिस शख्स का भाई उस के कब्जे में हो उस को चाहिए कि जो खुद खाये उस को भी खिलाये और जो खुद पहने उस को भी पहनाये और अपने गुलामो से उस काम का न कहो जो उन पर शाक (मसक्कत में डालने वाला काम)हो और अगर ऐसे काम की उन को तकलीफ दो तो खुद भी उन की मदद करो
(सही बुखारी:30)

शोहर की नाशुक्री

हज़रत इब्ने अब्बास रजिअल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है नबी करीम सल्लहो अलैही व सल्लम ने फरमाया -"(एक मर्तबा) मुझे दोजख दिखाई गई तो मेने उस मे ज्यातर औरतो को पाया, वजह ये के वो कुफ्र करती है । अर्ज किया या रसुल्लाह सल्लहो अलैही व सल्लम क्या अल्लाह का कुफ्र करती है ?तो आप ने फरमाया -"शोहर का कुफ्र करती है और एहसान नही मानती (ऐ शक्स )अगर तू किसी औरत के साथ एक जमाना दराज़ तक एहसान करता रह, बाद उसके कोई खिलाफ बात उसके देखे तो फौरन कह देगी -मैंने तुझ से कभी आराम नही पाया
(सही बुखारी:28)

अफज़ल अमल

हज़रत अबु हुरैरा रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लहो अलैही व सल्लम से पूछा गया कौन सा अमल अफ़ज़ल है तो आप सल्लहो अलैही व सल्लम ने फरमाया - अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाना ,कहा गया कि फिर कोन सा आप सल्लहो अलैही व सल्लम ने फरमाया अल्लाह की राह में जेहाद करना ,कहा गया कि उसके बाद कोन सा आप सल्लहो अलैही व सल्लम ने फरमाया  हज़्ज़ ए मबरुरा (मकबूल हज)
(सही बुखारी:25)

Sunday, December 30, 2018

शाने हज़रत उमर फारुख

हज़रत अबु सईद खुदरी रजिअल्लाहो तआला रिवायत करते है रसुल्लाह सल्लहो अलैही व सल्लम ने इरशाद फरमाया-"की मै सोने की हालत में था कि मैने ये ख्वाब देखा  लोग मेरे सामने पेश किए जाते है और उन के बदन पर कमीज़ है बाज़ की कमीज़ तो सिर्फ पिस्तानो तक ही है और बाज़ उन से नीचे है और उमर बिन  ख़त्ताब भी मेरे सामने पेश किए गए और उन के बदन पर जो कमीज़ है वो उस को खीचते हुए जाते है " सहाबा ने अर्ज़ की या रसुल्लाह सल्लहो अलैही व सल्लम आप ने इस कि क्या ताबीर ली ,आप सल्लहो अलैही व सल्लम ने फरमाया -"इस कि ताबीर दींन है"
(सही बुखारी:22)

ईमान वाले जहन्नुम से निकाल लिए जाएगे

हज़रत अंनस रजी अल्लाहो तआला अनहो से रिवायत है की रसूललाह सल्लाहो तआला अलेही व सल्लम ने फरमाया-"जब जन्नत वाले जन्नत मे और दोज़ख वाले दोज़ख मे दाखिल हो जाएगे उस के बाद अल्लाह तआला फरिश्तों से फरमाएगा -जिस के दिल मे राई के बराबर भी ईमान हो उस को जहन्नुम से निकाल लो , पस वो जहन्नुम से निकाल लिए जाएगे और वो जल कर स्याह काले हो चुके होगे, फिर वो नहरे हया या नहरे हयात मे डाल दिये जाएगे तब वो तरो ताज़ा हो जाएगे जिस तरह दाना (तरो ताज़गी ) के साथ पानी के साथ उगता है, ए (शक्स ) क्या तूने नहीं देखा के दाना केसा सब्ज ज़र्दी के माइल निकलता है
(सही बुखारी:21)

ईमान वाले जहन्नुम से निकाल लिए जाएगे

हज़रत अंनस रजी अल्लाहो तआला अनहो से रिवायत है की रसूललाह सल्लाहो तआला अलेही व सल्लम ने फरमाया-"जब जन्नत वाले जन्नत मे और दोज़ख वाले दोज़ख मे दाखिल हो जाएगे उस के बाद अल्लाह तआला फरिश्तों से फरमाएगा -जिस के दिल मे राई के बराबर भी ईमान हो उस को जहन्नुम से निकाल लो , पस वो जहन्नुम से निकाल लिए जाएगे और वो जल कर स्याह काले हो चुके होगे, फिर वो नहरे हया या नहरे हयात मे डाल दिये जाएगे तब वो तरो ताज़ा हो जाएगे जिस तरह दाना (तरो ताज़गी ) के साथ पानी के साथ उगता है, ए (शक्स ) क्या तूने नहीं देखा के दाना केसा सब्ज ज़र्दी के माइल निकलता है
(सही बुखारी:21)

कबरे अनवर से जहूर में अव्वलीन

हज़रत अनस बिन मालिक रजिल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"जब लोगो को कब्र से उठाया जाएगा तो सब से पहले में कब्र से बाहर आऊँगा"(तिर्मिज़ी,दरमी)
ये हदीस एक और जगह दूसरे अल्फ़ाज़ के साथ भी मरवी है
फरमाया-"मैं सब से पहला इंसान होऊँगा जिस के (बाहर निकलने के)लिए(कब्रकी)जमीन शक होगी और में ये बात फक्रिया नही कहता"
(तिर्मिज़ी,)

सब से ज्यादा अल्लाह को जानने वाले

हज़रत आईश रजिअल्लाहो तआला अन्हा कहती है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम लोगो को ऐसे आमाल का ही हुक्म देते थे जो वो हमेशा कर सके (आसान आमाल)सहाबा ने अर्ज किया- "या रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम हम आप ( सल्लाहो अलैहि व सल्लम) की मिसल नही है  बे शक अल्लाह ने आप के आगे और पीछे के गुनाह माफ् कर दिए है " इस पर आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम गजब नाक हुए हत्ता की आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम के चेहरे मुबारक से गुस्सा जाहिर होने लगा फिर आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया -"तुम में सब से ज्यादा अल्लाह को जानने वाला मै हु"
(सही बुखारी:19)

Saturday, December 29, 2018

फ़ितनों से भागना दीनदारी है

हज़रत अबु सईद खुदरी रजिअल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"करीब है कि मुसलमान का अच्छा माल बकरिया होगी जिन को ले कर वो पहाड़ो की चोटियो और चटियल मैदानों में चला जाये ताकि अपने दिन को फ़ितनों से बचाये"
(सही बुखारी:18 )

अंसार से मुहब्बत ईमान का हिस्सा है

हज़रत अनस बिन मालिक रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"अंसार से मुहब्बत करना ईमानदार होने की निशानी है और अंसार से दुश्मनी रखना मुनाफिक होने की अलामत है"
(सही बुखारी:16)

खुदा का हबीब


हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजी अल्लाहो तलहा अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"सुन लो! मैं अल्लाह तआला का हबीब हु ओर मैं ये बात पर फक्र नही करता ,मैं कयामत के दिन हम्द का झंडा उठाने वाला हु और मैं ये बात फक्रिया नही कहता ,कयामत के दिन सब से पहले शफाअत करने वाला भी मैं ही हु और सब से पहले मेरी शफाअत कबुल की जाएगी और मै ये बात फक्रिया नही कहता , सब से पहले जन्नत का कुंडा खटखटाने वाला मै ही हु ,अल्लाह तआला मेरे लिए इसे खोलेगा ओर मुझे इस मे दाखिल फरमाएगा मेरे साथ फ़क़ीर व गरीब मोमिन होंगे और में ये बात फक्रिया नही कहता ,मैं अव्वलीन व आख़िरीन में सब से ज्यादा इज़्ज़त वाला हु ओर मैं ये बात फक्रिया नही कहता"
(तिर्मिज़ी शरीफ़)

Friday, December 28, 2018

ईमान की मिठास

हज़रत अनस रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया जिस शक्स में ये तीन बाते हो वो ईमान की मिठास चख लेगा
1.अल्लाह और उस का रसूल तमाम से ज्यादा महबूब हो
2.जिस किसी से मुहब्बत करे तो अल्लाह के लिए
3.और कुफ्र में वापस जाने को ऐसा बुरा समझे जैसा आग में डाले जाने को
(सही बुखारी :15)

अपने भाई के लिए वही बात चाहना जो अपने लिए चाहे

हज़रत अनस रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया तुम में से कोई शक्स उस वक़्त तक (कामिल)मोमिन नही हो सकता जब तक अपने मुसलमान भाई के लिए वही न चाहे जो अपने लिए चाहता है
(सही बुखारी:12)

खाना खिलाना भी इस्लाम है

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजिअल्लाहो तआला अन्हो रिवायत करते है एक शख्स ने रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम से पूछा
किस किस्म का इस्लाम बेहतर है?
आप सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया "खाना खिलाओ और जिसको जानते हो या न जानते हो (सबको)सलाम करो
(सही बुखारी :11,27)

इस्लाम ही राहे निजात है

हज़रत अबू हुरैरा रजिअल्लहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया "उस जात की कसम जिस के कब्ज ए कुदरत मे मुहम्मद( सल्लाहो अलैहि व सल्लम)की जान है इस उम्मत में से जो शक्स को भी ख्वा वो यहूदी हो या नसरानी हो मेरी खबर सुने और खुदा का पैगाम जो में लाया हूं उस पर ईमान न लाये ओर मर जाये वो यकीनन दोजखी है"
(मुस्लिम)

ईमान का मज़ा

हज़रत अब्बास रजिल्लाहो तलहा अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया"जिसने अल्लाह को अपना रब ,इस्लाम को अपना दिन ओर मुहम्मद सल्लाहो अलैहि व सल्लम को  अपना रसूल मान लिया उस ने ईमान का मज़ा चख लिया"
(मुस्लिम)

ईमान का तकाजा

हज़रत अनस रजि अल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम फरमाया "कोई शख्स उस वक़्त तक कामिल मोमिन नही हो सकता जब तक के उस के नज़दीक मैं(नबी करीम)बाप बेटे और तमाम लोगो से ज्यादा महबूब न हो जाऊं"
(बुखारी व मुस्लिम)

ईमान की शाख

हज़रत अबु हुरैरा रजिअल्लाहो तआला अन्हो रिवायत करते है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैही  व सल्लम ने फरमाया-" ईमान की 70 से ज्यादा शाखे है इन सब मे सब से बेहतर इस बात का इकरार करना है कि खुदा के सिवा कोई माबूद नही और सब से कम दर्जे का ईमान किसी तकलीफ देह चीज़ को रास्ते से दूर करना है और शर्म -हाय भी ईमान की एक शाख है"
(बुखारी व मुस्लिम)

Thursday, December 27, 2018

इस्लाम की बुनियाद पांच चीज़ों पर है

हज़रत इब्ने उमर (रजि अल्लाहो तआला अन्हो)से रिवायत है रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया इस्लाम की बुनियाद 5 पांच चीज़ों पर रखी गई है
1.इस बात कि गवाही देना की खुदा के सिवा कोई माबूद नही और मुहम्मद सल्लाहो अलैहि व सल्लम खुदा के बंदे और रसूल है
2.नमाज़ पड़ना
3.ज़कात देना
4.हज काटना
5.रमज़ान के रोजे रखना
(बुखारी ,मुस्लिम,मिश्कात)

गुनाहों का कफ्फारा

हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें  जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान द...