Friday, December 28, 2018

अपने भाई के लिए वही बात चाहना जो अपने लिए चाहे

हज़रत अनस रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया तुम में से कोई शक्स उस वक़्त तक (कामिल)मोमिन नही हो सकता जब तक अपने मुसलमान भाई के लिए वही न चाहे जो अपने लिए चाहता है
(सही बुखारी:12)

No comments:

Post a Comment

गुनाहों का कफ्फारा

हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें  जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान द...