Thursday, October 10, 2024

गुनाहों का कफ्फारा


हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें  जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान दूसरे रमज़ान तक होने वाले छोटे गुनाहों का कफ़्फ़ारा हैं।   

Wednesday, October 9, 2024

इन निशानियो के बाद ईमान और अच्छे अमल कुबूल नही



अबू हुरैरा रदी अल्लाह अन्हु कहते हैं, रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "तीन निशानियां हैं। *जब ये दिखेंगी, तो किसी भी इंसान का ईमान लाना उसके लिए फायदेमंद नहीं होगा*, अगर उसने पहले ईमान नहीं लाया या ईमान के दौरान अच्छे काम नहीं किए। ये निशानियां हैं: 
1)सूरज का पश्चिम से निकलना, 2)दज्जाल का आना
3)ज़मीन से एक जानवर का निकलना।"

(मुस्लिम)

कयामत की निशानी

अबू हुरैरा रदी अल्लाह अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “जब क़यामत का समय करीब आएगा,

तो इल्म (ज्ञान) को खत्म कर दिया जाएगा, फितने (अराजकता) फैलेंगे, (लोगों के दिलों में) बुखल (कंजूसी) डाल दी जाएगी और हरज (हिंसा) बढ़ जाएगी।” किसी ने पूछा, हरज क्या है? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “क़त्ल (हत्या) 

Thursday, April 2, 2020

वित्र की नमाज़

हज़रत इब्ने उमर रजि अल्लाहो तल्लाह अन्हो रिवायत करते है कि हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया- "वित्र को अपनी आखरी नमाज़ बनाओ"

Wednesday, September 18, 2019

दाड़ी को रंगना


हज़रत इब्ने अब्बास रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि आप अपनी दाढ़ी को जर्द (लाल) रंग से रंगा  करते थे यहाँ तक के आपके कपडे भी जर्द हो जाते थे ,किसी ने आप से पूछा आप ये क्यों करते है तो आप ने फरमाया -"मेने आप सल्लहो अलैह व सल्लम को ये  करते देखा है,आपको ये रंग बहुत पसंद था हत्ता के आप अपने कपड़े और अपना इमामा(पगड़ी) भी रंग लिया करते थे
(Ref-: मिश्कात :4479)

Sunday, September 1, 2019

बरकतें ए नबी सल्लाहो अलैहि व सल्लम

हज़रत अनस से रिवायत है कि  रसूलल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम जब सुबह की नमाज़ पड़ लेते तो मदीने के खादिम बर्तन ले आते , जिसमे पानी होता था, वो जो भी बर्तन लाते आप सल्लहो अल्हे व सल्लम अपना दस्ते मुबारक (हाथ) उसमे डुबो देते थे, बसा औकात(कभी कभी)तो वो मौसम ए सरमा( सर्दी का मौसम)में आपके पास आ जाते आप अपना हाथ उसमे डुबो देते

नोट-दूसरी हदीस से पता चलता है कि असहाब हुज़ूर के हाथ लगाए पानी से फ़ैज़ उठाते ओर अपने मरीज़ों को पिलाते जिससे वो सेहत याब हो जाते

(मिश्कात :5808)

कयामत कब आएगी

एक बार हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम हम लोगो के बीच बेठ कर बाते कर रहे थे, कि एक अराबी आया और आप सल्लाहो अलैहे व सल्लम से सवाल किया -"कयामत कब आएगी?" आप सल्लहो अहले व सल्लम अपनी बात में मसरूफ रहे ,हम में कुछ ने ये कहा कि हुज़ूर सल्लहो अहले व सल्लम ने उसकी बात सुनी लेकिन पसंद नही फरमाई और कुछ ने कहा कि आप सल्लहो अलैह व सल्लम ने उसकी बात सुनी ही नही ,जब आप सल्लहो अलैहि व सल्लम अपनी बात खत्म कर चुके तो फरमाया -"कहा है वो कयामत का सवाल करने वाला?" उस देहाती ने कहा -"हाज़िर हु या रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम"  आप सल्लहो अलैह वसल्लम ने फरमाया-" जब अमानत(ईमानदारी) उठ जाए तो कयामत आने का इंतज़ार करो" ! उस ने कहा -"अमानत उठने का क्या मतलब है" आप सल्लहो अलैह व सल्लम ने फरमाया -"जब (हुकूमत के कारोबार) न लायक लोगो को सौप दिए जाएं तो कयामत का इंतेज़ार करो!
(सही बुखारी :किताबुल इल्म:58)

Sunday, July 21, 2019

किफायती सूरते

हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि अल्लाह ताला अनहो रिवायत करते हैं के एक रात में भारी बारिश में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तलाश में निकला तो मैंने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पा लिया आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कहो तो मैंने कहा मैं क्या कहूं तो आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया तुम सुबह शाम सूरह इखलास सूरह नास और सूरह फलक की तिलावत कर लिया करो यह तुम्हें काफी हो जाएगी
(मिश्कात)

Thursday, July 11, 2019

कब्र का अजाब

हजरत आयशा रजि अल्लाह ताला अन्हा फरमातीहै कि एक बार मेरे पास एक यहूदी  औरत आई और मुझसे खुशबू मांगने लगी मैंने उसे खुशबू दे दी उसके बाद उसने मुझे दुआ दी कि अल्लाह तुझे कब्र के आजाब से बचाए यह सुनकर मेरे दिल में शक जारी हुआ जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मेरे पास तशरीफ लाए तो मैंने आपसे पूछा या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम क्या कबर काअजाब होता है आपने फरमाया हां और उसे हर चौपाए सुनते हैं
सही मुस्लिम

Wednesday, July 10, 2019

औरत का जेहाद

हजरत आयशा रजि अल्लाह तआला अन्हा फरमाती  है कि मैंने एक बार हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम से पूछा क्या औरत पर जेहाद फर्ज है ,आप सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने फरमाया -"हां लेकिन उनके जहाज में किताल नहीं ,उनका जेहाद हज और उमरा है
(Miskatul masabeh)

रसूलअल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम को पसंद लेकिन

हज़रते आइशा राजिअल्लाहो तआला फरमाती है -अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कई एक  चीज को  छोड़ दिया करते थे हालांकि आपको वो पसंद थी।  सिर्फ इस ख्याल में
की आप को देख कर सहाबा भी ऐसा करने लगते फिर उन पर वो चीज़ फ़र्ज़ हो जाती ! आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम में कभी चाशत की नमाज़  नही पड़ी लेकिन मैं पड़ती हु
(सही बुखारी :1128)

गुनाहों का कफ्फारा

हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें  जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान द...