हज़रत अनस से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम जब सुबह की नमाज़ पड़ लेते तो मदीने के खादिम बर्तन ले आते , जिसमे पानी होता था, वो जो भी बर्तन लाते आप सल्लहो अल्हे व सल्लम अपना दस्ते मुबारक (हाथ) उसमे डुबो देते थे, बसा औकात(कभी कभी)तो वो मौसम ए सरमा( सर्दी का मौसम)में आपके पास आ जाते आप अपना हाथ उसमे डुबो देते
नोट-दूसरी हदीस से पता चलता है कि असहाब हुज़ूर के हाथ लगाए पानी से फ़ैज़ उठाते ओर अपने मरीज़ों को पिलाते जिससे वो सेहत याब हो जाते
(मिश्कात :5808)
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