Wednesday, July 10, 2019

रसूलअल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम को पसंद लेकिन

हज़रते आइशा राजिअल्लाहो तआला फरमाती है -अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कई एक  चीज को  छोड़ दिया करते थे हालांकि आपको वो पसंद थी।  सिर्फ इस ख्याल में
की आप को देख कर सहाबा भी ऐसा करने लगते फिर उन पर वो चीज़ फ़र्ज़ हो जाती ! आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम में कभी चाशत की नमाज़  नही पड़ी लेकिन मैं पड़ती हु
(सही बुखारी :1128)

Thursday, May 9, 2019

सहरी बरकत है

हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"सहरी खाओ की सहरी खाने में बरकत है"
(बुख़ारी:1804)

असल रोज़ा

फरमाया आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने -"जिस ने झूट बोलना ओर उस पर अमल करना तर्क नही किया तो अल्लाह (के लिए )उसे खाना पीना छोड़ देने की कोई जरूरत नही
(बुख़ारी:1785)

रोज़ेदार की मुँह की बू

हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"कसम है उस जात की जिसके कब्ज़े में मेरी जान है रोज़े दार के मुँह की बू अल्लाह के नज़दीक मुश्क की खुश्बू से बेहतर है
(बुख़ारी)

Wednesday, May 8, 2019

अफ़ज़ल औरत

हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया -"इस जमाने की औरतों में सब से अफ़ज़ल औरत खतीजा हैं और पिछले जमानो में अफ़ज़ल औरत मरियम बिन्ते इमरान है
(तिर्मिंजी)

जन्नती औरतो की सरदार

फरमाने मुस्तुफा सल्लाहो अलैहि व सल्लम है -" फ़ातिमा तमाम जहानों की औरतों ओर सब जन्नती औरतो की सरदार है
(सही बुख़ारी)

तेरी खुशी खुदा को अजीज

रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने हज़रत सैय्यदा फातिमा सलामुल्लाह अलैहा से फरमाया -"तुम्हारे गज़ब से गजबे इलाही होता है और तुम्हारी रिज़ा से रिज़ाये इलाही "

Monday, May 6, 2019

रोजेदारों के लिए अलग दरवाज़ा

हज़रत सईद बिन साद रजिल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि  व सल्लम ने फरमाया -"जन्नत के आठ दरवाजे है उसमें से एक का नाम रय्यान है उस दरवाजे में से सिर्फ रोज़ा रखने वाले दाखिल होंगे
(बुख़ारी , मुस्लिम,मिश्कात)

रोजेदार की मग़फ़िरत

हज़रत अबु हुरैरा रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया-"जिस किसी ने रमज़ान का रोज़ा अकीदत व ईमान के साथ हुसूल सवाब  के लिए रखा उसके पिछले गुनाह मुआफ़ कर दिए जाएंगे
           ओर  जो कोई खड़ा हुआ (क़याम)अकीदत ओर ईमान के साथ  उसके साबिका गुनाह बक्श दिए जाएंगे
(बुखारी ,मुस्लिम ,मिश्कात)

रमज़ान की पहली रात

हज़रत अबु हुरैरा रजि अल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया -"जब रमज़ान की पहली रात आती है तो जन्नत की दरवाज़े खोल दिये जाते है ,दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते है और एक मुनादी आवाज़ देता है-"ऐ नेकी के तालिब मुतवज़्ज़ो हो जाओ नेकी की तरफ और ऐ बुराई का इरादा रखने वाले बाज़ रह बुराई से ,और अल्लाह आज़ाद करता है बहुत से लोगो को दोजख से ओर ऐसा हर रात को होता है
(तिर्मिंजी ,इब्ने माज़ा, मिश्कात)

रमज़ान में बहारे करम

हज़रत इब्ने अब्बास रजिअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि -"जब रमज़ान का महीना आता तो हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम कैदी को छोड़ देते और हर मांगने वाले को अता करते
(बेहकी, मिश्कात)

गुनाहों का कफ्फारा

हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि  रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :   जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें  जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान द...