Wednesday, March 6, 2019

हुस्ने मुस्तुफा

हज़रत जाबिर बिन सुमेरः रजिल्लाहो तआला अन्हो फरमाते है-"एक रात चाँद पूरे जोबन (खूबसूरती )पर था ओर इधर हुज़ूर सल्लहो अलैही व सल्लम भी तशरीफ फ़रमा थे उस वक़्त आप सल्लहो अलैही व सल्लम सुर्ख(लाल) धारीदार चादर में मलबुस(पहने हुए) थे उस वक़्त में कभी आप सल्लहो अलैही व सल्लम के हुस्न जमाल पर नज़र डालता तो कभी चमकते चाँद पर पस(आखिरकार) मेरे नजदीक हुज़ूर सल्लहो अलैही व सल्लम चाँद से कई ज्यादा हसीं लग रहे थे
(तिर्मिंजी शरीफ)

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