हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : जब बड़े गुनाहों से बचा जाए तो पाँच नमाज़ें जुमा दूसरे जुमा तक और रमज़ान दूसरे रमज़ान तक होने वाले छोटे गुनाहों का कफ़्फ़ारा हैं।
Thursday, October 10, 2024
Wednesday, October 9, 2024
इन निशानियो के बाद ईमान और अच्छे अमल कुबूल नही
अबू हुरैरा रदी अल्लाह अन्हु कहते हैं, रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: "तीन निशानियां हैं। *जब ये दिखेंगी, तो किसी भी इंसान का ईमान लाना उसके लिए फायदेमंद नहीं होगा*, अगर उसने पहले ईमान नहीं लाया या ईमान के दौरान अच्छे काम नहीं किए। ये निशानियां हैं:
1)सूरज का पश्चिम से निकलना, 2)दज्जाल का आना
3)ज़मीन से एक जानवर का निकलना।"
(मुस्लिम)
कयामत की निशानी
अबू हुरैरा रदी अल्लाह अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “जब क़यामत का समय करीब आएगा,
तो इल्म (ज्ञान) को खत्म कर दिया जाएगा, फितने (अराजकता) फैलेंगे, (लोगों के दिलों में) बुखल (कंजूसी) डाल दी जाएगी और हरज (हिंसा) बढ़ जाएगी।” किसी ने पूछा, हरज क्या है? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “क़त्ल (हत्या)
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गुनाहों का कफ्फारा
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